बुधवार, 19 अप्रैल 2017

खुद की पहचान

तुम खुद ही खुद के शत्रु हो
और खुद ही खुद के साथी हो
जब बात समझ ये आ जाती है
तब दुनिया सारी भा जाती है ॥

फिर अपना किसी को नहीं कहते हो
और कोई पराया नहीं लगता है
जब जनमानस सोता रहता है
तब अंत्रमन तेरा जगता है ॥

जब अपना पराया भूल जाते हो
जब खुद को ही तुम धूल पाते हो
तब भेदभाव सब भूल जाता है
तब न कोई शत्रु होता है
न साथी कोई रह जाता है ॥

सुशील कुमार पटियाल
© कॉपीराइट
दिनांक: 16-04-2017
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