शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

जिए जा रहे हैं

बस जिए जा रहे हैं
क्या खोया और क्या पाया है
ये हिसाब किए जा रहे हैं
रोज एक दिन आता है
एक रात चली जाती है
दिए बुझते हैं, बाती सुलग जाती है
खुद से खुद ही खफा रहने लगे हैं
थोड़ा सेहत का भी करो
लोग यह हम से कहने लगे हैं
हर बार जख्म गहरे जाते हैं
पर सिलने की, नाकाम सी कोशिश किए जा रहे हैं
बस जिए जा रहे हैं
क्या खोया और क्या पाया है
ये हिसाब किए जा रहे हैं ॥

धन हो पास तुम्हारे
तो मित्र कई मिल जाते हैं
बन जाते हैं कई सहारे
मगर हम तो वह भी पा न पाए
दिल के तराने कहां किसको सुनाएं
सब तो अपने मन की किए जा रहे हैं
जिंदगी जैसे ज़हर बन गई
और वही जहर पीए जा रहे हैं
बस जिए जा रहे हैं
क्या खोया और क्या पाया है
ये हिसाब किए जा रहे हैं ... ॥

सुशील कुमार पटियाल
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O4-02-2017  O7:.21 PM

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Thanks for loving me

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Bye bye dear

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