बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

जीवन के दिन चार

प्यार में गुजार दे, ये जीवन के दिन चार है
प्रेम नहीं यह जानता कहां कोठी बंगला कार है
सब कुछ सहता है वह इंसान
जिसके सर पर प्यार सवार है
प्यार में गुजार दे कि जीवन के दिन चार है ॥

रोष में न कभी होश रहता है
यह पागल कवि, वो दीवाना कहता है
रूठ के रहना, न कुछ भी कहना
बिन तेरे, मेरा नीरस ये संसार है
प्यार में गुजार दे, ये जीवन के दिन चार है ॥

सदा के लिए नहीं हैं सांसें
वक्त कहां किस किस को जांचे हैं
यह जीवन भी तो नहीं है अपना
यह सांसें भी तो उधार हैं
प्यार में गुजार दे, ये जीवन के दिन चार है ॥

 Sushil Kumar Patial
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31-01-2017
5:00 AM
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