रविवार, 8 जनवरी 2017

पल-पल पाप कमाता है

कल का पता नहीं है पगले
क्यों पल-पल पाप कमाता है
पल पल तेरा पतन हो रहा
क्यों ना कोई तुझे समझाता है ॥

सत्य रहेगा सदा सनातन
रुह है अपनी अमर पुरातन
देह यहीं पे दान किए जा
न संग चलेगा तन और धन ॥

संग लाया था क्या -
जो खोने का डर सताता है
जैसा बीज बीजता धरा में
फल वैसा ही पता है ॥

पाप का बोझ बढ़ाने में
कुछ तेरा भी हिस्सा है
तू अकेला नहीं जगत में
ये तो हर इंसान का किस्सा है॥

माना तू बलवान बहुत है
पर क्यों बलहीन को सताता है
पापों की ये पोटली लेकर
क्यों पापी कहलाता है ॥

कल का पता नहीं है पगले
क्यों पल-पल पाप कमाता है ॥

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सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: 01-08-2016
समय: 07:07 AM


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