शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016

एक दिन तुमको पाएंगे

तुमको चाहा है हमने और एक दिन तुमको पाएंगे
इस जन्म नहीं सौ जन्म सही, इक दिन प्यार निभाएंगे
और नहीं अब चाहत कोई तेरी चाह में मरते जाएंगे
तुमको चाहा है हमने और एक दिन तुमको पाएंगे ॥

तुम तड़पाओ अब जितना, भले न हम से बात करो
पर प्रेम मेरा ये सच्चा है इसका न उपहास करो
तेरे चाहने वाले हजारों, कभी हमको भी तो याद करो
तुम तड़पाओ अब जितना, भले न हम से बात करो ॥

तुम मुस्कुरा के देख लो बस, इतना तो एहसान करो
माना तुम हो किरण चांद की, पर इतना ना अभिमान करो
हमने तुमको पल - पल चाहा, हर पल तुम तुमको चाहेंगे
तुम न निभाओ कोई बात नहीं, पर हम तो सदा  निभाएंगे!!
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सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: 30-12-2016
समय: 5 AM

सोमवार, 26 दिसंबर 2016

बस्ती बस्ती घोर उदासी

बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन
मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तन चंदन
इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है
एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन
जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल एक ऐसा इकतारा है
जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है
झूम रही है सारी दुनिया, जबकि हमारे गीतों पर
तब कहती हो प्यार हुआ है, क्या अहसान तुम्हारा है
जो धरती से अम्बर जोड़े, उसका नाम मोहब्बत है
जो शीशे से पत्थर तोड़े, उसका नाम मोहब्बत है
कतरा कतरा सागर तक तो,जाती है हर उमर मगर
बहता दरिया वापस मोड़े, उसका नाम मोहब्बत है
इस उड़ान पर अब शर्मिंदा, मैं भी हूँ और तू भी है
आसमान से गिरा परिंदा, मैं भी हूँ और तू भी है
छूट गयी रास्ते में जीने – मरने की सारी कसमें
अपने अपने हाल में जिंदा, मैं भी हूँ और तू भी है

साभार- डॉ कुमार विश्वास

पगली लड़की

अमावस  की  काली  रातों  में, जब दिल  का  दरवाजा  खुलता  है ,
जब  दर्द  की  प्याली  रातों  में,  गम  आंसूं के  संग  होते  हैं ,
जब  पिछवाड़े  के  कमरे  में , हम  निपट  अकेले  होते  हैं ,
जब  घड़ियाँ  टिक -टिक  चलती  हैं , सब  सोते  हैं , हम  रोते  हैं ,
जब  बार  बार  दोहराने  से  , सारी  यादें  चुक  जाती  हैं ,
जब  उंच -नीच  समझाने  में , माथे  की  नस  दुःख  जाती  हैं ,
तब  एक  पगली  लड़की  के  बिन  जीना  गद्दारी लगता  है ,
और  उस  पगली  लड़की  के  बिन  मरना  भी  भरी  लगता  है .


जब  पोथे    खाली  होते  हैं , जब  लोग सवाली  होते  हैं ,
जब  ग़ज़लें  रास  नहीं  आतीं , अफसाने  गाली  होते  हैं .
जब  बासी  फीकी  धुप  समेटें , दिन  जल्दी  ढल  जाता  है ,
जब  सूरज  का  लश्कर , छत  से  गलियों  में  देर  से  जाता  है ,
जब  जल्दी  घर  जाने  की  इच्छा , मन  ही  मन  घुट  जाती  है ,
जब  कॉलेज  से  घर  लाने  वाली , पहली  बस  छुट  जाती  है ,
जब  बेमन  से  खाना  खाने  पर , माँ   गुस्सा  हो  जाती  है ,
जब  लाख  मन  करने  पर  भी , पारो  पढने  आ  जाती  है ,
जब  अपना  हर  मनचाहा  काम   कोई  लाचारी  लगता  है ,
तब  एक  पगली  लड़की  के  बिन  जीना  गद्दारी  लगता   है ,
और  उस   पगली  लड़की  के  बिन  मरना  भी  भारी  लगता  है 


जब  कमरे  में  सन्नाटे  की  आवाज  सुनाई देती  है ,
जब  दर्पण  में  आँखों  के  नीचे  झाई  दिखाई  देती  है ,
जब  बड़की भाभी  कहती  हैं , कुछ  सेहत  का  भी  ध्यान  करो ,
क्या  लिखते  हो  दिनभर , कुछ  सपनों  का  भी  सम्मान  करो ,
जब  बाबा  वाली  बैठक  में  कुछ  रिश्ते  वाले  आते  हैं ,
जब  बाबा  हमें  बुलाते  हैं , हम  जाते  हैं , घबराते  हैं ,
जब  साड़ी  पहने  एक  लड़की  का,  एक  फोटो  लाया  जाता  है ,
जब  भाभी  हमें  मनाती  हैं , फोटो  दिखलाया  जाता  है ,
जब  सारे  घर  का   समझाना  हमको  फनकारी  लगता  है ,
तब  एक  पगली  लड़की  के  बिन  जीना  गद्दारी  लगता  है ,
और  उस  पगली  लड़की  के  बिन  मरना  भी  भारी  लगता  है 


दीदी  कहती  हैं  उस  पगली  लड़की  की   कुछ  औकात  नहीं ,
उसके  दिल  में  भैया  , तेरे  जैसे  प्यारे  जज्बात   नहीं ,
वो   पगली  लड़की  नौ  दिन  मेरे   लिए  भूखी   रहती  है ,
छुप  -छुप  सारे  व्रत  करती  है , पर  मुझसे  कभी  ना  कहती  है ,
जो  पगली  लड़की  कहती  है , मैं  प्यार  तुम्ही  से  करती  हूँ ,
लेकिन  मै  हूँ  मजबूर  बहुत , अम्मा -बाबा  से  डरती  हूँ ,
उस  पगली  लड़की  पर  अपना  कुछ  अधिकार  नहीं  बाबा ,
ये   कथा -कहानी   किस्से  हैं , कुछ  भी  तो  सार  नहीं  बाबा ,
बस  उस  पगली  लड़की  के  संग   जीना  फुलवारी  लगता  है ,
और  उस  पगली  लड़की  के   बिन  मरना  भी  भारी  लगता  है ॥

साभार- डॉ कुमार विश्वास

गुरुवार, 22 दिसंबर 2016

मिलन के इंतजार में

मौत से मिलन के इंतजार में
बैठा हूं कब से तैयार मैं
फिर प्रिय क्यों तुम आती नहीं
कुछ नहीं इस दिखावे के संसार में ॥

तुम्हें पाने को
गहरी नींद में तेरी बाहों में सो जाने को
अब दिल जैसे बेचैन सा है
अब विस्वास नहीं प्रेम-प्यार में
मौत से मिलन के इंतजार में
बैठा हूं कब से तैयार मैं

तुम ही तो इक सच्ची प्रेमिका
करती कोई भेद भाव नहीं
अब देर भला क्यों करती हो
क्या तुम को भी हमसे प्यार नहीं

अब बांध लो अपने पाश में
न मन लगता, स्वार्थ के संसार में
मौत से मिलन के इंतजार में
बैठा हूं कब से तैयार मैं ॥

© Copyright
सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: 11-20-2016 12:20 AM

उजाला हो गया

घटा से निकल आया चांद
और उजाला हो गया
हम खो गए हैं तुझ में
और दिल का दिवाला हो गया ॥

कौन न चाहे चांद को पाना
सब चांद की चाहत रखते हैं
चंद भले हो सांसे फिर भी
चांद की चमक में फंसते हैं ॥

दोष हमारा न था सारा
न देखा तुझ सा मासूम
बस दिल ने तुझे पुकारा
आंख खुलते ही ख्वाव खो गया

घटा से निकल आया चांद
और उजाला हो गया ॥

© Copyright
 सुशील कुमार पटियाल
 दिनांक: 22-12-2016
समय : 4:33 AM

सोमवार, 19 दिसंबर 2016

My words!

My words could be stern
But my heart is mild
I say what I feel
It is crystal like a child.

I never meant to hurt
I never ever flirt
Please accept my apologies
At least write two words;
- Apology accepted
That'll ease my heart.

My smiles hide agony
But my appearance tells the.
 truth
I know, you know
What I think and how does it look
No one listened, when I cried
But my heart is crystal like a child

How can you be so tough
How can you be so stern
I could not understand
I could not learn
May love prevail in your heart!
Don't consider it like dirt
I never meant to hurt ..

© Sushil Kumar Patial

What is it?

Why I think of you all the time!
I know you can't be mine
But I still wish to see myself in your list
I hope this is not a kind of crime

I am ardent enough
To confess the mistakes
But you are still stern
Put my life on stakes

You are the Venus
The goddess of love
Mercy is your propensity
Just forgive the cub.

I don't have other mean express
Just help me to come out of stress
I need nothing but your smile
How the feelings can be suppressed

© Sushil Kumar Patial

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

हम तरसते हैं

तेरी मुस्कराहटों की झलक पाने को हम तरसते हैं
हम तो पड़े रहे सहरा में प्यासे,
तेरे प्यार के बादल कहीं और जा के बरसते हैं॥

ऐसे देखते हैं तेरी ओर चोरी-चोरी,चुपके-चुपके
कि कहीं नज़रें ये मिल न जायें
कभी चाहते हैं कि गुफ्तगू हो आँखों ही आँखों में
कि नज़रे मिल ही जायें, बस नज़रें ये मिल ही जायें ॥

© Copyright  सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: 09-12-2016
समय: 03:03PM

गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

जानना हैं मुश्किल

किसी को जानना हैं मुश्किल
किसी को पहचानना है मुश्किल
ये मुश्किल भरा जहान है
खुद को ही मान बैठे हैं खुदा
मगर मुश्किल में खुद की जान है ॥

मोहब्बत के पैगाम को
भूल गए हैं अल्हा और राम को
रोज सजने लगी है महफिल यहां
मगर पहचान नहीं इंसाँ की इंसान को

किसी का प्यार पाना है मुश्किल
किसी का सार पाना है मुश्किल
ये मुश्किल भरा जहान है
खुद को समझे थे इंसान हम
मगर समझे नहीं, कि भीतर भी शैतान है ॥

वक़्त की इन लहरों पर
अपना अक्ष तक न खोज पाते हैं
बस ख्यालों में और ख्वाबों में
हर पर खोये से जाते हैं

किसी को तुफान लगते हैं मुश्किल
किसी को इंसां लगते हैं मुश्किल
ये मुश्किल भरा जहान है
इंसान बनना है कितना मुश्किल
इसी मुश्किल में सारा जहान है ॥

खुद को ही मान बैठे हैं खुदा
मगर मुश्किल में खुद की जान है ॥

© Copyright सुशील कुमार पाटियाल
दिनांक: 08-12-2016
समयः 7:51AM

सरल हूं, साफ हूं

ना कुदृष्टि है मेरी
न ही कुटिल मैं
सरल हूं, साफ हूं
न ही जटिल हूं मैं  ॥

तूने जाना कुटिल मुझे
पर हृदय से में पाक हूं
तुम ही हो कठोर हृदय
मैं तो धूल हूं, राख हूं ॥

काश मैं इतना सरल न होता
पत्थर सा होता कठोर ह्दय
द्रवित न होता, तरल न होता

कभी झुकाया न मस्तक मैंने
मगर तूने ये भी सिखा दिया
मिट्टी का हूं पुतला
मिट्टी में मिल जना है
इतना सब कुछ सिखा दिया ॥


© Copyright सुशील कुमार पाटियाल
दिनांक: 08-12-2016
समयः8: O4 AM

Thanks for loving me

Thanks for loving me

Bye bye dear

Bye bye dear