शनिवार, 26 नवंबर 2016

तुम से प्यार है!

सात दिन तो जैसे
सात जन्मों का इन्तजार है
कैसे कहूं मैं हे प्रिये
के हम को तुमसे प्यार है ॥

तुम्हें देखे तो वर्षों बीत गए
हम हारे तुम जीत गए
तू तो मेरे प्यार का संसार है
कैसे कहूं  मैं हे प्रिये
के हम को तुमसे प्यार है ॥

तू माने या न माने
प्रीत समझे या न जाने
दिल जलता है जैसे कोई अंगार है
कैसे कहूं मैं हे प्रिये
के हम को तुमसे प्यार है ॥

पल-पल पलकों पे भारी
न सोये अंखियां ये रैन सारी
तुम तरुणाई प्रेम की
तेरे सामने फीका श्रृंगार है
कैसे कहूं मैं हे प्रिये
के हम को तुमसे प्यार है ॥

© Copyright सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: 26-11-2016 1:29PM

शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

मेरी बातों में!

छुप-छुप के रोना
रात-रात भर न सोना
ये रोग भला है कौन सा
जो इन्सां था बातुनी बहुत
क्यों रहने लगा है मौन सा ॥

तुम ही तुम हो आंखों में
बस, बस गई हो जैसे सांसों में
साथ तेरा चाहे मिलाना मुश्किल
तुम रहोगी सदा मेरी बातों में ॥

तुम बिन जैसे पल पल भारी
जैसे सदियां बीत गई हो सारी
तेरी मुस्कान है जैसे,
कोई झोंका पवन की पौन सा
जो इन्सां था बातुनी बहुत
क्यों रहने लगा है मौन सा ॥

© Copyright
सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: 25-11-2016 11:33AM

कोई बात नहीं

वो नज़रें मिलाना
नज़रें मिला के फिर ऐसे झुकाना
जैसे कोई बात नहीं
माना दूरियां हैं दिलों गहरी
मगर फिर भी तुम दिल में कहीं ॥

तुझ संग बैठ के
वक्त गुज़र जाए
कोई तो सुझाये
कुछ ऐसा उपाए

खड़े हैं तेरे इन्तज़ार में
बस वहीं के वहीं
वो नज़रें मिलाना
नज़रें मिला के फिर ऐसे झुकाना
जैसे कोई बात नहीं ॥

© Copyright
 सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: 22-11-2016
समय : 6:44 AM

सोमवार, 21 नवंबर 2016

देह की गति

देह तेरी जलानी है
या फिर दफनानी है
नवनीत सी देह हो
चाहे वर्षों पुरानी है
बस इतनी सी तेरी कहानी है ॥

चाहे तू बड़ा ज्ञानी है
चाहे बड़ा अभिमानी है
चाहे अग्नि सा हो तेज तेरा
चाहे स्वभाव से बिलकुल पानी है
देह तेरी जलानी है
या फिर दफनानी है ॥

कुंद कलिक और केश सघन
बस रंग - रूप में रहे मगन
समझे अमिट ये जवानी है
पर नहीं पता है अगला पल
हो जानी देह बेगानी है
देह तेरी जलानी है
या फिर दफनानी है
बस इतनी सी तेरी कहानी है ॥

© Copyright सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: 21-11-2016 6:49 AM

शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

प्रतीक्षा तुम्हें पाने की

पुनर्जन्म की प्रतीक्षा में
पल-पल जीवन बीत रहा
इस जन्म में मेल है नहीं प्रिये
मिलते हैं आगे-
जो अन्त भला और ठीक रहा ॥

आस तुम्हें अब पाने की
कहां चाह रही अब ज़माने की
अब तू ही मन का मीत रहा
पुनर्जन्म की प्रतीक्षा में
पल-पल जीवन बीत रहा ॥

दिल दिमाग पे राज है तेरा
कुछ भी तो न अब यहां मेरा
अब बिन साज़ के ये संगीत रहा
पुनर्जन्म की प्रतीक्षा में
पल-पल जीवन बीत रहा ॥

कहना चाहा हाल- ऐ दिल
पर तुम यह समझ न पाई प्रिये
हम रहे बस प्रतीक्षा में
और तड़फ - तड़फ हम जिए

जब से तुम हो दूर गई
न मुहूर्त कोई अभिजीत रहा
पुनर्जन्म की प्रतीक्षा में
पल-पल जीवन बीत रहा ॥

© Copyright  सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: 18-11-2016, 10:09 PM

छल के छलावे

छ्ल के इस छलावे में
क्या रखा है दुनिया के दिखावे में
आज लोग अ़क्ल से न जाने
विस्वास है बस पहनावे में ॥

मदमस्त हुआ यूं घूमें मानव
दिखने लगा अब हर कोई दानव
दर्द पराये से पीर कहां अब
सच्चा इन्सां धीर कहां अब
सब आ जाते बहलावे में

छ्ल के इस छलावे में
क्या रखा है दुनिया के दिखावे में ॥

यहां प्यार के बदले
तकरार मिलती है
सांसे भी अब तो उधार मिलती हैं
हर कोई जी रहा एक छलावे में
क्या रखा है दुनिया के दिखावे में ॥

© Copyright सुशील कुमार पटियाल

सोमवार, 14 नवंबर 2016

पल दो पल का साथ

चमक चांद की चन्न लम्हें
फिर अंधेरी रात है
जीवन यहां है पल दो पल का
बस पल दो पल का साथ है ॥

मांगा साथ न पैसा मांगा
फिर न जाने क्यों तू उदास है
किसी और की भला में क्या कहूं
बस मेरे लिए तू खास है ॥

भाव भला है मेरा सदा
पर मुश्किल में अब श्वास है
जीवन यहां है पल दो पल का
बस पल दो पल का साथ है ॥

पलकें एक दिन पलट जाएंगी
उस दिन सुंदर आंखें छलक जाएंगी
फिर रहना तुम्हें उदास है
तुम्हारे लिए मैं न सही
पर मेरे लिए तू खास है ॥

जीवन यहां है पल दो पल का
बस पल दो पल का साथ है
चमक चांद की चन्न लम्हें
फिर अंधेरी रात है॥

© Copyright सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: 14-11-2016
Time:. 01:01 PM

सोमवार, 7 नवंबर 2016

वो राक्षस कहलाए

राक्षस सदा ही रक्त बहाए
दिल दुखाए,
दर्द किसी का समझ न आए
इसीलिए तो वो राक्षस कहलाए ॥

दुख में देखें दुनिया को तो
मन उन का मजे में मुस्कुराए
किसी माँ से बिछड़ा हो बच्चा
उस माँ का दिल कैसे न कहराए ॥

अभी खाते जाओ जानवर को
फिर इंसान की बारी है
किस ओर यह जगत है जा रहा
यह घोर अंत की तैयारी है ॥

मुस्लिम दफनाते हैं मुर्दा
और हिंदू देता उसे जलाए
राक्षस नहीं यह समझता
दिया उदर शमशान बनाए ॥

राक्षस सदा ही रक्त बहाए
दिल दुखाए,
दर्द किसी का समझ न आए
इसीलिए तो वो राक्षस कहलाए ॥

© Copyright सुशील कुमार पटियाल
 दिनांक: 07-11-2016 4:43 PM


शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

तरक्की तूफानों की

माना तूफान तरक्की कर जाते हैं
मगर कितने डरते हैं तुफाँ से
और देखो कितने ही मर जाते हैं
माना तूफान तरक्की कर जाते हैं॥

लाशों के ढेर पर चढ़कर
जो खुद को महान बताते हैं
खुद खा जाते लाशों को
और जिंदा को दफनाते हैं
माना तूफान तरक्की कर जाते हैं॥

दूजे का जो दर्द ना जाने
वही तो दानव कहलाते हैं
अपना दर्द उन्हें बड़ा लगता है
दूजे पर हंसते जाते हैं
माना तूफान तरक्की कर जाते हैं॥

© Copyright
सुशील कुमार पटियाल

बुधवार, 2 नवंबर 2016

नसीब न होंगे

वह दिन दूर नहीं है अब
जब चार कंधे भी नसीब न होंगे
चाहने वाले तो खूब मिलेंगे
अपने फिर भी करीब ना होंगे
वह दिन दूर नहीं ह अब
चार कंधे भी नसीब ना होंगे ॥

स्वार्थ के संसार में
अब रिश्तो ने दम हैं तोड़ रहे
सुनते हैं अब बच्चे
बूढ़े मां-बाप को छोड़ रहे
आने वाले वक्त के लोग
देखना कितने अजीब होंगे
वह दिन दूर नहीं ह अब
चार कंधे भी नसीब ना होंगे ॥

अक्षर ज्ञान तो पा रहे
पर शिक्षा का अभाव रहा
छू जाएंगे चांद को
सब का मकसद खास रहा
मिलता नहीं वो चांद मगर
आगे लोग अब शरीफ न होंगे
वह दिन दूर नहीं ह अब
चार कंधे भी नसीब ना होंगे ॥

सुशील कुमार पाटियाल
2-11-2016 5:26 AM

ये कैसे जगत में

ये कैसे जगत में भेजा तूने
जहां हर जीव है अभिमानी
देख दिखावे के पीछे
धाव रहे हैं देखो ज्ञानी
ये कैसे जगत में भेजा तूने
जहां हर जीव है अभिमानी ॥

दर्द पराये कहां दिखते हैं
यहां इंसां आ कर खुद बिकते हैं
वो जाने क्या होती बदनामी
जाने किस आग में दुनिया जलती है
क्यों तड़फ रही दुनिया बिन पानी
ये कैसे जगत में भेजा तूने
जहां हर जीव है अभिमानी ॥

मैं चाहूं कि तू मुझे बुला ले
हे इस जगत के रखवाले
माना हूँ मैं मूर्ख कामी
तू दाता है, तू ही दयालू
अब क्षमा भी कर दो मेरी नादानी
ये कैसे जगत में भेजा तूने
जहां हर जीव है अभिमानी ॥

सुशील कुमार पटियाल
02-11-2016 1:54 AM

Thanks for loving me

Thanks for loving me

Bye bye dear

Bye bye dear