मंगलवार, 25 अक्तूबर 2016

तुम जानती हो

मैं जानता हूं तुम जानती हो
मेरे दिल में क्या है
मेरी आंखो से पहचाती हो
मैं जानता हूं परिणाम है क्या
तुम भी बनी अंजान सी हो
मैं जानता हूं तुम  जानती हो ॥

तुमसे मिलने को
बातें करने को जी करता है
मगर गलती से भी गलत न हो
इस बात से दिल ये डरता है
अब तो यूं लगता है जैसे
मेरी खोई हुई पहचान सी हो
मैं जानता हूं तुम  जानती हो ॥

तुम्हारा हंसना, मुस्कराना
खोज के बहाना, तुम्हें देखना
और फिर मिलने जाना
भला ऐसा क्यों ये दिल करता है
आँखों से न ओझल होना
अब जैसे मेरी जान सी हो
मैं जानता हूं तुम  जानती हो ॥

© Copyright
सुशील कुमार पटियाल
दिनांक: अक्टूबर 25, 2016
समय: 5:29 AM



रविवार, 23 अक्तूबर 2016

वक़्त वक़्त की बात है

सब वक़्त वक़्त की बात है
कल वक़्त हमारे साथ था
आज वक़्त तुम्हारे साथ है
सब वक़्त वक़्त की बात है ॥

कभी पलते हैं खुशियों के पल
कभी गमों की रात है
कभी उदासी के पल पलते
कभी उजालों की बरसात है
सब वक़्त वक़्त की बात है ॥

कहते हैं वक़्त बड़ा बलवान है
सामने उसके किसी की क्या औकात है
आज चलो चाहे तन के कितना
पर आखिर में राख है
सब वक़्त वक़्त की बात है ॥

© Copyright
सुशील कुमार पटियाल
दिनांक : अक्टूबर 23, 2016
समय: 6: 36 AM

शनिवार, 22 अक्तूबर 2016

अच्छा लगता है

कुछ न लवों से कहना
बस उन्हें देखते रहना
अच्छा लगता है
उन लवों पे रहे मुस्कान सदा
देख उन्हें ही दिल धड़कता है॥

आंखों के समंदर में
आकाश की अठखेलियां
कहना है क्या
कह जाते हैं क्या
बुझाते है बस पहेलियां ॥

क्यों नींद नहीं हमेंआती है
क्यों जगना अच्छा लगता है
कुछ न लवों से कहना
बस उन्हें देखते रहना
अच्छा लगता है ॥

© Copyright सुशील कुमार पटियाल
तिथी- अक्टूबर 22, 2016
समय-5: 25 AM

Thanks for loving me

Thanks for loving me

Bye bye dear

Bye bye dear