शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

याद भुलाना न

प्रभू आगे जो भी जीवन देना
अपनी याद भुलाना न
ज़हन में नाम चले तेरा ही
मेरी यादों से कभी जाना न  ।।

जीवन सुन्दर दिया ये तूने
सो मन ये मेरा माना न
उलझ गया हूं जगत-जाल में
पर तुम तो मुझे भुलाना न ।।

मुर्ख मन की मन्त्रणा से
अब तू मुझे चलाना न
ज़हन में नाम चले तेरा ही
मेरी यादों से कभी जाना न ।।

माफ करो

प्रभू जी, मेरे चित का दर्पण साफ करो
अब तक जो भी हुई गलतियां
उन सब को माफ करो
प्रभू जी, मेरे चित का दर्पण साफ करो ।।

खुद को समझा पाक साफ मैं
पर मन में रहा विकार भरा
काम, क्रोध और लोभ-मोह का
घडा तो अब भी नहीं भरा ।।

मुझ को शरण में ले लो अपनी
अब तो न उदास करो
जीवन अब तक आम रहा
कुझ अब तो प्रभू जी खास करो

अब तक जो भी हुई गलतियां
प्रभू जी मुझ को माफ करो
धूल जमीं  है चित पे मेरे
मेरे चित का दर्पण साफ करो ।।

स्वयं समझ न पाए



कस्तूरी वन-वन भटक रही है
क्यों मंद मंद मुसकाय,
स्वयं समझ न पा रही
ये सुगंध कहां से आए ।।

यही हाल कुछ है हमारा
ईश है भीतर मेरे अपने
ढूंढ लिया ये जग सारा

देख के सुन्दरता इस जग की
आंखे फिर भी भटक रही हैं,
पल पल जीवन खत्म हो रहा
तन पे तलवार लटक रही है

सुन्दरता के मद में फूला
बल पे रहा हघाय
कोई लगते हैं अपने से
कोई लगते है पराये
दशा दुरुस्त नहीं मन की
करूं भला क्या हाय

कस्तूरी वन-वन भटक रही है
क्यों मंद मंद मुसकाय,
स्वयं समझ न पा रही
ये सुगंध कहां से आए ।।

      

Thanks for loving me

Thanks for loving me

Bye bye dear

Bye bye dear