सोमवार, 4 नवंबर 2013

सब के लिये

जब तक जी में जान है
कोई मुर्ख तो कोई महान है
कोई गुणवान तो कोई नादान है
कोई नि्र्धन तो कोई  धनवान है
कोई बुढा तो कोई  जवान है ।।

कहीं अल्हा तो कहीं राम है
कहीं शान्ति तो कहीं तुफान है
कहीं दीनता तो कहीं गुमान है
कहीं लूट तो कहीं लगान है ।।

कोई इन्साँ तो कोई शैतान है
कोई अन्जान तो कोई महमान है
कोई कमजोर तो बलवान है
सबसे आखिर में मगर
सब के लिये शमशान है ।।   


Written on 23-10-2013
                 सुशील कुमार पटियाल 

Thanks for loving me

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Bye bye dear

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