सोमवार, 4 नवंबर 2013

सब के लिये

जब तक जी में जान है
कोई मुर्ख तो कोई महान है
कोई गुणवान तो कोई नादान है
कोई नि्र्धन तो कोई  धनवान है
कोई बुढा तो कोई  जवान है ।।

कहीं अल्हा तो कहीं राम है
कहीं शान्ति तो कहीं तुफान है
कहीं दीनता तो कहीं गुमान है
कहीं लूट तो कहीं लगान है ।।

कोई इन्साँ तो कोई शैतान है
कोई अन्जान तो कोई महमान है
कोई कमजोर तो बलवान है
सबसे आखिर में मगर
सब के लिये शमशान है ।।   


Written on 23-10-2013
                 सुशील कुमार पटियाल 

सोमवार, 21 अक्तूबर 2013

राख तो एक दिन होना है



ये जीवन तो जीवन भर का रोना है
इस सोने जैसी काया को तो
राख तो एक दिन होना है...
अभिमान भला फिर कैसा है
सब कुछ रहता पडा यहीं
चलता जगत ज्यूं जैसे का जैसा है ।।
कोई चोरी-बइमानी में उलझा
जीवन रह जाता अनसुलझा
यही तो कारण है इस जग में
कहीं बाढ,कहीं सूखा है;
प्रण करो ऐ देश प्रेमियों
हमें अन्त्रमन को धोना है
इस सोने जैसी काया को तो
राख तो एक दिन होना है ।।

कुछ और ही होगा



न हिन्दू न कोई मुसलमान है
जिसमें नहीं है प्यार-मुहब्बत
कुछ और ही होगा ...
मगर नहीं वो कोई इन्सान है ।।
लहू जो बहता है रगों में
अगर नहीं सुर्ख सफेद है
उसी मू्र्ख के हृदय में
रहता ऊँच-नीच का भेद है
खुद को इन्सान कहते हैं
बस इसी बात का खेद है ।।
पल दो पल का जीवन है
ये जीवन बना संग्राम है
जिसमें नहीं है प्यार-मुहब्बत
कुछ और ही होगा
मगर नहीं वो कोई इन्सान है ।।
 
                     

शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

ज़रा जल्दी से उपचार करो

प्रभू रोको चित की चंचलता
मेरा भी उद्दार करो
कभी बुरा न निकले मुंह से मेरे
तनिक इतना हो उपकार करो ।।

दुनिया के इस जंगल में
दिखते इन्साँ मुझ को कम
अमीर, गरीब का हिस्सा खा रहा
क्यों दुनिया का दिल हो रहा तंग
प्रभू न हमको यूं लाचार करो  ।।

बिगडी हुई इस बुद्धि का
ज़रा जल्दी से उपचार करो
प्रभू रोको चित की चंचलता
मेरा भी उद्दार करो ।।


                  सुशील कुमार पटियाल

आपसी तकरार से

न तीर से न तलवार से
इन्सां तो देखो मर रहा
केवल आपसी तकरार से ।।
खुश होता है,
किसी को दुख में देख के
मिलता सुख उसे,
किसी का गला रेत के
सुख दुख बाँटना भूल गया
बात न होती, बिन हथियार से
न तीर से न तलवार से
इन्सां तो देखो मर रहा
केवल आपसी तकरार से ।।
प्रेम प्यार अब जिस्मानी हो गया
सच्चा प्रेम अब लुप्त हो गया
मेहनत से जी चुराता है
तन मन से यूँ सुस्त हो गया
कुछ न करता,
बस बैठे हो के लाचार से
न तीर से न तलवार से
इन्सां तो देखो मर रहा
केवल आपसी तकरार से ।।



        
                                   सुशील कुमार पटियाल
 

मंगलवार, 1 अक्तूबर 2013

चोर - चोर मोसेरे भाई



चोर - चोर मोसेरे भाई
बचा जो इनसे
ले गया जमाई
खत्म हो रहा देखो खज़ाना
जनता बैठी मारे जम्हाई ।।
राम रहीम पे लडाते हैं
सब मेवा मिलकर खाते है
गरीब के हिस्से में तन्हाई
चोर - चोर मोसेरे भाई
बचा जो इनसे
ले गया जमाई ।।



सुशील कुमार पटियाल

शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

कृपया मेरा साथ दो


 हे ईश्वर - कृपया मेरा साथ दो
डूब न जाऊं मझधार में
बढा के अपना हाथ तुम
अब तो मुझे उबार लो ।।
अभिमान से कहीं मैं भर न जाऊं
दुश्मन से कहीं डर न जाऊं
काम कभी न हो मुझ से ऐसा
की खुद का आइना देख न पाऊं ।।
... छोटी सी ये जिन्दगी
पाप पुण्य का लेखा है
कोई माने या फिर न माने
पर मैंने तो ये देखा है।।
जीवन बीता अब तक जितना
सब दे दिया संसार को
हाथ रहे हैं खाली अब तक
अब प्रचूर अपना प्यार दो
और जीवन मेरा संवार दो
हे ईश्वर - कृपया मेरा साथ दो ।।

सुशील कुमार पटियाल
07-07-2013
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मंगलवार, 8 जनवरी 2013

चोरों को पकडवाने की सज़ा मुझे क्यों? चोरों के हाथों से अपना फोन छुडवाया पुलिस के हाथ में फसाया।



मेरे साथ ०३-०१-२०१३ शाम ७ बज कर ५ मिन्ट पर एक दु्र्घटना हुई। मैं शाम को डयूटी जा रहा था और रा के पुरम के गेट नम्बर ३ पे अपनी औफिस कैब का इन्तज़ार कर रहा था। उसी समय दो चोर मोटरसाइकल पर सवार आये और मेरे सामने बाइक खडी कर दी और पूछने लगे, भैय्या यहां सैक्टर ५ में एक यादव कोचिंग सेंटर है, उस का पता बता सकते... हैं। मैंने कहा, "मुझे मालूम नहीं है आगे जा के पता कर लो"। एक चोर ने पूछा कि यह गेट नम्बर ३ है? मैंने कहा हां यही गेट नम्बर ३ है।
तव एक चोर कहा भैय्या एक काल करवा देंगे हमारे फोन में बैलेंस खत्म हो गया है, मैंने कहा ठीक है नम्बर बताओ। उन्होंने यह नम्बर दिया- ९९५३४५८६२४। मैंने नम्बर मिलाया और यादव कोचिंग सेंटर के बारे में पूछा तो जबाव आया, रोन्ग नम्बर है। फिर चोर ने कहा नम्बर तो सही है, यह अंकित सर का नम्बर है। पलीज़ एक बार मुझे मिलाने दो। मैंने सीधे स्वभाव से फोन उसे दे दिया उसी टाइम आगे वाले बाइक सवार ने बाइक भगाना शुरू कर दिया। तभी मैंने लपक कर बाइक पकड ली और जोर लगा कर बाइक गिरा दी और दोनों को पकड लिया और शोर मचाया और कुछ देर में लोग इक्कठे हो गये। मैंने अपना फोन उन से छीन लिया, भीड में से किसी ने पुलिस को काल कर दिया और करीब ५-८ मिनट में पुलिस आ गई। पुलिस ने मेरा नाम पता लिखा और मुझे थाने चलने को कहा। मैंने कहा मैं औफिस जा रहा हूं और अभी नहीं जा सकता। उन्होंने कहा ठीक है सुबह ८ बजे सैक्टर -१२ के थाने आ जाना और ऐ एस आई पंकज ठाकरान या एस आई धर्मपाल से मिलना, मैंने कहा ठीक है।
मैं सुवह ८ बजे (०४-०१-२०१३) को सैक्टर -१२ के थाने पंहुचा मगर एस आई धर्मपाल जी नहीं मिले। मैंने किसी से नम्बर लिया और एस आई धर्मपाल जी को काल की। जबाव आयाः मैं घर पर हूं आप ए एस आई पंकज ठाकरान से मिलो। मैं ए एस आई पंकज ठाकरान के पास गया और तो उसने कहा, अभी मेरे पास टाइम नहीं है, बाद में आना।
मै दोपहर में सो रहा था तो एस आई धर्मपाल आए और मुझे अपनी बाइक पर सैक्टर -१२ के थाने मेरा बयान नोट करने के बहाने ले आऐ। उन्होंने कहा एक आधे घण्टे में काम हो जाएगा। FIR दर्ज की गई, उन्होंने मेरा फोन भी यह कह के अपने पास रख लिया आज शाम ये कोर्ट में दिखाना है और कल मुझे वापिस कर देंगे। मैंने उन्हे वताया कि मुझे आफिस की कैब से फोन आते हैं और फोन नहीं दे सकता, तो उन्होंने कहा की आज मैनेज कर लो कल वे खुद ही फोन वापिस कर देंगे। मैं मान गया और फोन जमा करवा दिया। एस आई धर्मपाल जी ने यह भी कहा था की वह हमें घर छोड देंगे मगर जब उनका काम हो गया तो कहा अब आप खुद से चले जाओ। मैं पैसे ले के भी नहीं आया था और फिर मुझे घर पैदल जाना पडा और परेशानी का सामना करना पडा। और उस दिन शाम को मैं फोन न होने की वजह से औफिस नहीं जा पाया।
आज ०५ -०१ - २०१३ को कोई भी मेरा फोन वापिस करने नहीं आया तो मैंने एस आई धर्मपाल जी को फोन किया कि आप मेरा फोन वापिस कर दो तो उन्होंने कहा कि फोने वापिस लेने के लिय कोर्ट में Application देनी होती हैं मैंने उन्हें कहा कि मुझे चोरों को पकडवाने के सजा क्यों मिल रही हैं, इस से तो अच्छा होता कि मैं अपना फोन ले के उन चोरों को जाने देता। एस आई धर्मपाल जी मुझे आश्वासन दिया कि वे कल आफिस आने पर फोन करेंगे और आगे देखते हैं क्या होता है। मैंने उन्हें बताया कि फोन की वजह से मैं औफिस नहीं जा पाया तो मेरी नौकरी तक जा सकती है क्योंकि मैं रात की नौकरी करता हूं और केवल फोन ही एक communication mode है.
वाह रे मेरे देश का कानून, चोरों की बजाय उन लोगों को सज़ा मिलती है जो समाज में सुधार करना चाहते हैं। अब मुझे सच में टेंशन हो गई है।


मैने कई बार एस आई धर्मपाल सिंह को काल की कि मेरा फोन वापिस दे दो। उन्होंने कहा मेरे साथ कोर्ट चलना, जब मैंने उन्हें सुवह काल की तो उन्होंने कहा मैं वयस्त हूं और तुम साकेत कोर्ट आ जाओ मैं वहीं मिलूंगा। मैंने कहा ठीक है, जब मैं घर से निकला तो मैंने उन्हें फिर काल करनी चाही कि आप कहां मिलोगे, मैंने लगातार ३ काल की मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया। फिर मैंन वापिस आ गया क्योंकि वहां से कोई जबाव नहीं आया। अब तो मैं और परेशान हो गया था। मैंने सोचा क्यों ने किसी बडे पुलिल अधिकारी से बात की जाय तो मैंने इन्टरनेट से डी सी पी छाया और ए सी पी  Bharat Singh (साउथ) का नम्बर सर्च किया। दो बार डी सी पी छाया को 9818099047 नम्बर पर काल किया मगर उन्होंने फोन उठाया नहीं, फिर मैंने ए सी पी Bharat Singh को 9811310891 नम्बर पे काल की, पहले तो उन्होंने Wrong number बताया मगर जब मैंने कहा कि ये नम्बर मुझे police ke website से मिला तो उन्होंने मुझे ए सी पी महेन्दर सिंह (साउथ) का नम्बर दिया। जब मैंने ए सी पी महेन्दर सिंह को काल किया तो उन्होंने कहा कि आपने बहुत अच्छा काम किया है और आज ही वे मेरा मोबाइल वापिस दिलायेंगे और FIR की copy भी आज ही भिजावा देंगे। (ये बात 07-01/2013 की है)। मगर इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ। 08-01/2013 की सुबह मैंने उन्हें फिर काल किया तो उन्होंने वताया कि वे भूल गए थे। FIR की copy मुझे 09-01/2013 शाम 7:00 बजे मिले, सिपाही सुरेन्द्र सिंह ले के आए थे।   ए सी पी महेन्दर ने कहा कि आप अभी थाने जाओ और SHO से मिलो। मैं थाने गया मगर SHO नहीं मिले। फिर मैं एस आई धर्मपाल सिंह से मिला, पहले तो उनसे थोडी वहस कि, मैंने पुछा कि आप ने मेरा फोन किस आधार लिया था, क्या आप ने चोरों को पकडा था। उन्होंने कहा तू ज्याद श्याणा बन रहा है। अगर कानूनी procedure में नहीं फसना था तो चोरों को पकडवाने के लिए काल क्यों की थी। मैंने पूछा क्या चोरों को पकडवा कर मैंने कोई गुनाह किया था। तव झिझक के उन्होंने कहा मैं ही Application लिख देता हूं, इस Application को ले कर साकेत कोर्ट जा और फोन Release करवा ले। इसी बीच मैंने ए सी पी महेन्दर सिंह को काल किया और फिर एस आई धर्मपाल सिंह से बात करवाई। बात करते ही एस आई धर्मपाल सिंह का रवैया बडा नरम हो गया।
एस आई धर्मपाल सिंह एक Application लिखी और फिर एक और कोई Letter लिखा और कहा इसे कोर्ट नम्बर 210 राम खिलाडी को दिखा देना आज ही फोन Release हो जाएगा। मैं कोर्ट गया राम खिलाडी नहीं मिले मगर माननीय न्यायधीश राजेश शर्मा को मैंने वो Application और letter दे दिया। मैं एक/डेड घण्टा वहां बैठा रहा, तब उन्होंने कहा कि कल (11-01-2013) को दो बजे आना। मैंने कहा ठीक है और वापिस आ गया। आगे देखते हैं कब तक ये फोन वापिल मिल पाता है। अभी तो केस अदालत में शुरू भी नहीं हो पाया है, ये तो मेरा अपना फोन पुलिस से वापिस लेने की कवायत है।


Ponderable points

१ -  जब मैंने चोरों को पकडवाया तो एक पुलिसवाले ने कहा आपको अभी थाने चलना पडेगा, मैंने बताया अभी मैं डयूटी जा रहा हुं और नहीं जा सकता। मुझे सुवह ८ बजे बुलाय गया। मैं time पे पंहुचा मगर मुझे वापिस भेज दिया कि दोपहर में आना जबकि मैं रात भर काम करके आया था।

२ - दोहपर १ बजे एस आई धर्मपाल आए ये कह कर साथ ले गए कि आप का बयान चाहिए फिर मैं वापिस आप को घर छोड दुंगा। मेरे पापा भी साथ चले। मगर जब उनका काम हो गया, हमें कहा गया कि आप जा सकते हैं हमें और बहुत काम है। हमारे पास पैसे नहीं थे, २ किलोमीटर पैदल चल के घर आना पडा।

३ - मुझ से मेरा मोवाइल मांगा गया, मैंने मना कर दिया क्यों कि मोवाइल की वजह से औफिस जाना होता है। मगर मुझे कहा गया कि आप को फोन कल वापिल मिल जाएगा, अभी कोर्ट में दिखाना पडेगा। मुझे अंधरे में रखा गया। आज ११ दिन हो चुके हैं मेरे पास फोन नहीं है।

४ - मुझे नहीं बताया गया की फोन वापिस लेने के लिए कोर्ट तक जाना पडेगा।
५ - FIR की copy मुझे 09/01/2013 को 7 शाम को ACP Mahender Singh की involvement के बाद मिली जबकि FIR 04/01/2013 को दर्ज हुई थी।

६ - मुझे कोर्ट अकेले भेजा गया जबकि पुलिस को साथ होना चहिए था, इसी वजह से judge ने मुझे दोवारा आने को कहा। क्या आम आदमी के समय की कोई कीमत नहीं  होती। मानसिक परेशानी अलग से उठानी पडती है।

Thanks for loving me

Thanks for loving me

Bye bye dear

Bye bye dear