सोमवार, 18 मई 2009

आश न कोई

टूटे सपने आश न कोई
न नर्म है बिस्तर
सडक पे सोई
धित्तकारा सेठ ने
छुप छुप के रोई
टूटे सपने आश न कोई।।
सडक पे सोई
पुलिस ने डांटा
हाथ लगाए, मारे चांटा
गरीब का नहीं इस देश में कोई
टूटे सपने आश न कोई ।।
खाना खोजूं कूडे में मैं
क्या इसी को भारत कहते हैं
हाथी के इन पांवों तले
हम निर्धन दलते रहते हैं
जाने इस अंधियारे घर में
कब खुशियों की आए लोई
टूटे सपने आश न कोई ।।


सुशील कुमार पटियाल

मंगलवार, 12 मई 2009

पुंजीवाद के बढते कदम

पुंजीवाद के बढते कदम
आम इन्सां का घुटता दम
न आंख किसी की हो रही नम
फिर भी कहते हैं सब सम
पुंजीवाद के बढते कदम।।
धनबान धूप से डरे भला क्यों
आम इन्सां डरता है ज्यों
जाने किसका कैसा कर्म
पुंजीवाद के बढते कदम।।
नंगा नाच नचाएगा ये
पूंजीवाद कहलाएगा ये
पूंजी के लिए नहीं रही शर्म
पुंजीवाद के बढते कदम।।



सुशील कुमार पटियाल
गांव मसलाणा खुर्द, बडसर, हमीरपुर
हिमाचल प्रदेश
मो० ९२१०९८६५७५

मुर्दा हो गए

मुर्दा खाने वालों के
मन भी मुर्दा हो गए
जगते रहे वो आंखों से पर
अन्र्मन से सो गए
मुर्दा खाने वालों के
मन भी मुर्दा हो गए।।
मरता है जब इन्सां देखो
जल्दी रहती जलाने की
जीभ के स्वाद के खातिर
बस बात चाहिए बहाने की
जान तो सब को प्यारी है
तेरे सामने जाने जीव कितने रो गए
पर मु्र्दा खाने वालों के
तो मन ही मुर्दा हो गए ।।

सुशील कुमार पटियाल
गांव मसलाना खुर्द, बडसर, हमीरपुर
हिमाचल प्रदेश
मो० ९२१०९८६५७५

Thanks for loving me

Thanks for loving me

Bye bye dear

Bye bye dear