सोमवार, 23 मार्च 2009

दूर तलक

राही राहों में न रहना
दूर तलक तुम्हें जाना है
मूंद नहीं यूं आंखें अपनी
अभी तो जग को जगाना ।।
मंजिल तो अभी दूर बडी है
परीक्षा की तो यही घडी है
जोश जगा ले रगों में अपनी
अब नहीं चलना कोई बहाना है ।।
माना ज़माने की भीड में -
तुझको है खोने का डर
मंजिल पे नज़र टिकाए रख तू
भर के साहस हर काम तू कर
सोच तझे भी कुछ कर दिखाना है ।।

सुशील कुमार पटियाल
गाँव मसलाणा खुर्द,
डाक घर झञ्ज्याणी,
तहसील बडसर,
जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेस

Thanks for loving me

Thanks for loving me

Bye bye dear

Bye bye dear