मंगलवार, 5 अगस्त 2008

प्यार के खातिर

किसको किस से प्यार यहां
सबका अपना - अपना जहान है
कुछ प्यार के खातिर तरसते हैं
कुछ पैसे के लिए तरसते हैं
कहीं तो सूखा ही रहता है
कहीं बादल घनघोर बरसते हैं


सुशील कुमार पटियाल
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Thanks for loving me

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Bye bye dear

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