शुक्रवार, 29 अगस्त 2008

औजा़र हैं !

मुट्ठी भर लोगों के
हाथों में संसार है
वो ही तो इंसान हैं
हम तो केवल औजा़र हैं ।।

सुशील कुमार पटियाल

बुधवार, 6 अगस्त 2008

अधिकार तुम्हारा

देश के खातिर यारो हमको
जीना है मरना है
देश का सर ऊंचा हो जिससे
वही काम तुम्हें करना है ।।
तुम्हीं से जुडा है भविष्य देश का
तुम से है हर शान
तीर हाथ में है तुम्हारे अब
खींचना है बस तुझे कमान ।।
आज का नेता तुझे नहीं बनना
बनना है नेता कल का
सच्चाई को तू छोड न प्यारे
कभी साथ न देना छल का ।।
फुटपाथ पे सोते देखे मैंने
खुद नर्म बिस्तर पे रात बिताते है
जनहित में जो पैसा आए
उससे नेता मौज उडाते हैं ।।
दोस्तो - अधिकार तुम्हें है अपना पाना
तू न इनसे कभी घबराना
नेताओं की पोल खोल के
घोटालों से नकाव हटाना ।।
हर कोई शक्ति है पास तुम्हारे
डरते हो फिर क्यों तुम प्यारे
डाकू नेताओं का भण्डा फोड
सत्ता से उन्हें बाहर निकाले ।।


सुशील कुमार पटियाल

सौंदर्य

आंखे तेरी हिरणी जैसी
झील समा जाएगी
मेरी आंखों से बहेंगे आंसू
याद तेरी जब आएगी ।।
चांद सा चेहरा
भोली सी सूरत
तेरे आगे है क्या
संगमरमर की मूरत ।।
चाल है तेरी नागिन जैसी
किसे क्या बताऊं
मैं करता तुमसे प्यार हूं
दुनियां से कैसे छुपाऊं ।।

सुशील कुमार पटियाल

मंगलवार, 5 अगस्त 2008

प्यार के खातिर

किसको किस से प्यार यहां
सबका अपना - अपना जहान है
कुछ प्यार के खातिर तरसते हैं
कुछ पैसे के लिए तरसते हैं
कहीं तो सूखा ही रहता है
कहीं बादल घनघोर बरसते हैं


सुशील कुमार पटियाल

चलो कहीं दूर ...

छोड के रिस्ते नातों को
चलो मन कहीं दूर चलें
जहां न अपना,
हो न पराया हो,
न अपना बन के कोई छले
चलो मन कहीं दूर चलें ।।
पैसे का जहां नाम न हो
प्यार की जहां शाम न हो
जहां दूर - दूर तक प्यार पले
चलो मन कहीं दूर चलें ।।
लोग जहां पे हंसते हो
न पापी वहां पे बसते हों
न निर्धन को धनवान दले
चलो मन कहीं दूर चलें ।


सुशील कुमार पटियाल

प्यार का आधार

प्यार का आधार है पैसा
पैसा है तो ठीक है सबकुछ
हो कोई चाहे कोई ऐसा वैसा
प्यार का आधार है पैसा ।।
पैसे बिन कोई प्यार करे न
बिन पैसे कोई जिए मरे न
बिन पैसे दुख हरि हरे न
पैसे वाला कभी डरे न ।।
न माता किसी को रोती है
न पिता किसी को रोता है
न पत्नि किसी को रोती है
न भ्राता किसी को रोता है
बांध के रखता है जो सबको
वो बस पैसा होता है ।।


सुशील कुमार पटियाल

मंजिल बनी वो मेरी

मन ममता में रम गया
मंजिल बनी वो मेरी
और नहीं कोई चाहत मुझको
हो दिन उजला या रात अंधेरी ।।
जाने सब कुछ मुझको भूल गया क्यों
अब न भूले सूरत तेरी
मन ममता में रम गया
मंजिल बनी वो मेरी ।।
माना जब से तुझ को अपना
जीवन लगता सुन्दर सपना
ये दुनिया लगती राख की ढेरी
धडकन बदल गई जो उसकी
जान निकल जाऐगी मेरी
मन ममता में रम गया
मंजिल बनी वो मेरी ।।



सुशील कुमार पटियाल

मान लो तुम

ममता मेरी जान लो तुम
बात मेरी अब मान लो तुम
यकीन न हो तो मुझे बताना
चाहे मेरी जान लो तुम
पर बात मेरी अब मान लो तुम ।।
धन दौलत की नहीं कामना
और न ही संसार की
ममता बिन जीना मुमकिन नहीं
मुझे ज़रूरत है तेरे प्यार की
तुम ही मेरी जिन्दगी का खिलता कुसुम
बात मेरी अब मान लो तुम ।।
वक्त बदल जाए चाहे
न प्यार कभी कम हो ये अपना
न तुम बे-वफा हो, न हम बे-वफा हों
प्यार का सुन्दर हो एक सपना
देखो बदल न जाना तुम
ममता मेरी जान हो तुम
बात मेरी अब मान लो तुम ।।

सुशील कुमार पटियाल

Thanks for loving me

Thanks for loving me

Bye bye dear

Bye bye dear